आस्था
प्रतिदिन की आरती और माँ के चरणों में समर्पण।
जहाँ हर प्रार्थना सुनी जाती है, और हर श्रद्धालु को माँ का आँचल मिलता है।
स्थानीय लोगों की गहरी धार्मिक आस्था से जुड़ा यह मंदिर गोलमा और आसपास के क्षेत्रों के लिए विशेष महत्व रखता है।
नवरात्र और दुर्गा पूजा के अवसर पर अनेक गांवों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
स्थानीय रूप से यह मंदिर मनोकामना मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु दोबारा माता के दर्शन करने आते हैं।
मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, यह एक महत्वपूर्ण सभा स्थल भी है।
नवरात्र की पूजा, शाम की आरती और दुर्गा पूजा का मेला इसे एक जीवंत स्थानीय केंद्र बनाते हैं।
॥ या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ॥
उस देवी को नमन, जो समस्त प्राणियों में शक्ति के रूप में विराजमान हैं।
माँ दुर्गा शक्ति का साक्षात् स्वरूप हैं।
महिषासुर का वध कर माँ ने संसार को यह शाश्वत संदेश दिया।
इस मंदिर में माँ के दर्शन मात्र से मन का बोझ हल्का हो जाता है।
इन तीन स्तंभों पर यह मंदिर खड़ा है।
प्रतिदिन की आरती और माँ के चरणों में समर्पण।
भजन, कीर्तन और सत्संग के माध्यम से परंपरा का हस्तांतरण।
प्रसाद वितरण, भंडारा और जरूरतमंदों की सहायता।
मंदिर परिसर, दर्शन और उत्सवों के कुछ क्षण।
वर्ष भर मंदिर में मनाए जाने वाले प्रमुख पर्व।
नौ दिनों तक माँ के नौ रूपों की आराधना।
वर्ष के प्रथम मास में माँ की आराधना।
बिहार का सबसे श्रद्धेय पर्व।
मंदिर परिसर हजारों दीपों से जगमगा उठता है।
प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव पर शोभायात्रा।
हर पूर्णिमा की संध्या पर भजन-कीर्तन।
बोल बम! हर हर महादेव!
विशेष सूचना
जो भक्त दूर हैं, वे यहाँ बैठकर भी आरती का अनुभव कर सकते हैं।
मंदिर सहरसा जिले के गोलमा गाँव में स्थित है।